नमस्कार दोस्तों आज कल इनकम टैक्स बचाने  का एक और विकल्प लेकर हाज़िर हूँ यह विकल्प इतना प्रसिद्ध नहीं है जितना की नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट है परन्तु इसमें निवेश करने पर आपको जितने भी Income tax saving  उत्पाद उपलब्ध है उनमें से सबसे कम लॉक इन इस स्कीम में  है आईये जानते है इस स्कीम की विशेषताएं  और खतरे क्या है 

What is Equity Linked Saving Scheme ?  इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम  क्या होती है ?



  1. इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम
  2. योग्यता 
  3. निवेश की सीमा
  4. लोन सुविधा
  5.  आयकर छूट 
  6.   टैक्स 
  7. लॉक इन पीरियड
  8. इसे कहां से ख़रीदे
  9. खतरा और  रिटर्न

इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम: वास्तव में  यह एक म्यूच्यूअल फण्ड का एक प्रकार है जो की स्टॉक मार्किट में  निवेश करता है अगर आप म्यूच्यूअल फण्ड नहीं जानते हैं  तो मैंने एक पूरा लेख म्यूच्यूअल फण्ड पर लिखा है आप उसे पढ़  सकते है।  खैर  अगर आप म्यूच्यूअल से परिचित है तो इसमें निवेश करने  पर आपको म्यूच्यूअल फण्ड की भांति यूनिट allot होते हैं 

योग्यता -इस स्कीम में  कोई भी भारतीय नागरिक जिसकी उम्र 18 वर्ष से अधिक है निवेश कर सकता है परन्तु  minor जिनकी उम्र 18 के नीचे है निवेश कर  सकते हैं परन्तु इसके लिए इन्हे अपने अभिवावक के साथ सयुंक्त खाता  खोलना होगा 


निवेश की सीमा – इसमें कम से कम १०० रूपये  और और अधिकतम निवेश करने की कोई सीमा नहीं है 100 रूपये के बाद की धनराशि 1 रूपये के गुडांक में  होनी चाहिए.  इसमें आप SIP की भांति या एक साथ lump sum दोनों तरह से निवेश कर सकते है  

लोन सुविधा – इस स्कीम में  निवेश करने पर  आपको वित्तीय आपातकाल की स्थिथी में  लोन लेने की सुविधा उपलब्ध नहीं है 

 आयकर छूट -इस स्कीम में  निवेश करने पर आपको निवेश की गयी राशि पर आयकर की 1969 की धरा 80C के तहत छूट प्राप्त होती है  इसका मतलब यह है जितनी भी राशि इस स्कीम में  निवेश करेंगे वह राशि टोटल इनकम में घट जाती है परन्तु 80C के अंतर्गत अधिकतम 150000 की छूट मिलती है 

लॉक इन पीरियड – इस स्कीम में  निवेश करने पर आपको बाजार में  जितने भी उत्पाद है जो की 80C के अंतर्गत छूट प्रदान करते हैं उनमें से सबसे कम लॉक इन period  इस स्कीम में है।  इस स्कीम में  निवेश करने पर आपका  3 साल का Lock In पीरियड होता है इसका मतलब यह है जो भी आपको यूनिट निवेश करने के बदले allot होते है उनका टाइम जैसे 3 साल  से ज्यादा होता है उसे आप भुना सकते है अगर आप इस और  अधिक समय तक रखना चाहते हैं  तो इसे रख सकते है।  म्यूच्यूअल फण्ड स्टेटमेंट में  ये locked यूनिट और free यूनिट  के रूप में  प्रदर्शित होते है locked यूनिट वह यूनिट होते है. 

टैक्स – इसमें मिलने वाले रिटर्न पर आयकर लगता है जो की long term capital  gain (LTCG ) होता है परन्तु LTCG तब लगता है जब एक financial ईयर में आपका कुल प्रॉफिट 100000 रूपये से अधिक हो।   

इसे कहां से ख़रीदे – इसमें निवेश करने के लिए आप किसी ब्रोकर  / बैंक से सम्पर्क कर सकते है आजकल लगभग सारे बैंक म्यूच्यूअल फण्ड उत्पाद बेच रहे है परन्तु अगर आप ब्रोकर या बैंक से ये उत्पाद खरीदते है तो यह रेगुलर प्लान होंगे अगर आप रेगुलर प्लान और डायरेक्ट प्लान नहीं जानते है आप मेरा एक आर्टिकल पढ़ सकते हैं जो की डायरेक्ट और रेगुलर म्यूच्यूअल फण्ड पर ही है।   

डायरेक्ट म्यूच्यूअल फण्ड फण्ड और रेगुलर म्यूच्यूअल  फण्ड क्या होते हैं ? What are  direct mutual fund  and regular mutual  fund ?

खतरा और  रिटर्न  – इस स्कीम में  निवेश करने पर आपका रुपया शेयर बाजार पर  म्यूच्यूअल फण्ड हाउस के फण्ड मैनेजर द्वारा लगाया जाता है  अतः स्कीम में निवेश करने पर रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है परन्तु   पिछले 5 वर्षों का औसत रिटर्न 10 से 12 % तक रहता है।  अगर आप इस स्कीम में निवेश करने की सोच रहे है तो आप किसी Qualified  Financial  advisor  से जरूर  सलाह ले लें। 

By ANKIT SACHAN

मेरा नाम अंकित सचान है और मूलतः मैं कानपुर उत्तर प्रदेश जिले के घाटमपुर तहसील से सम्बन्ध रखता हूँ मैंने B.tech Electrical Engineering की शिक्षा उत्तर प्रदेश के सरकारी Engineering कॉलेज (Bundelkhand Institute of Engineering & Technology Jhansi ) ली है तदुपरांत मैंने प्राइवेट सेक्टर को चुना और अपनी नौकरी शुरू की अब तक मैँने २ कंपनियों में नौकरी की है मैंने Ramky Enviro Engineers Ltd में 8 वर्ष तथा PI Industries में करीब 1 साल से काम कर रहा हूँ

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